सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करने वालों को मिला नंद बाबा और गोकुल पुरस्कार, मंत्री ने दुग्ध समितियों के माध्यम से व्यवसाय करने का आव्हान किया
उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने वर्ष 2022-23 में प्रदेश के सर्वाधिक दुग्ध आपूर्तिकर्ता 66 दुग्ध उत्पादकों को गोकुल पुरस्कार और गाय के सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करने वाले 48 दुग्ध उत्पादकों को नन्दबाबा पुरस्कार से सम्मानित किया। सम्मान समारोह का आयोजन लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में किया गया।
पुरस्कार प्राप्त करने वाले सभी 114 दुग्ध उत्पादकों को प्रतीक चिन्ह, पुरस्कार धनराशि और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रेरणा से भारतीय गोवंशीय देशी गाय के दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है और गोवंश का संरक्षण एवं संवर्धन राज्य सरकार की प्राथमिकता है। दुग्ध विकास मंत्री ने उत्पादकों से दुग्ध समितियों के माध्यम से व्यवसाय करने का आह्वाहन किया। उन्होंने कहा कि एक माह के अंदर दुग्ध समितियों के दुग्ध मूल्य का भुगतान कराया जायेगा।
कार्यक्रम में गोकुल पुरस्कार के अंतर्गत लखीमपुर-खीरी जनपद निवासी एवं वेलवा मोती समिति के वरूण सिंह को राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार और मेरठ के रहने वाले रुहासा दुग्ध समिति के हर्ष मित्तल को द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया। इन दोनों दुग्ध उत्पादकों को क्रमशः 2 लाख रुपये एवं 1.50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि तथा शेष अन्य चयनित लाभार्थियों को जनपद स्तरीय पुरस्कार के तहत 51 हजार रुपये की राशि प्रदान की गई । इसी प्रकार नंदबाबा पुरस्कार के तहत अयोध्या निवासी उधौली दुग्ध समिति के लवलेश कुमार को राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित करते हुए पुरस्कार स्वरूप 51 हजार रुपये की राशि प्रदान की गई । इनके अलावा जनपद स्तरीय पुरस्कार के तहत 21 हजार रुपये की राशि प्रदान की गई। इस अवसर पर धर्मपाल सिंह ने सभी विजेताओं को बधाई दी और कहा कि पुरस्कृत 114 दुग्ध उत्पादकों में से 26 महिला लाभार्थी है, जो दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में महिलाओ की भागीदारी का एक सशक्त उदाहरण है।
मंत्री ने कहा विभाग द्वारा दूध प्रोसेसिंग की कमियों को दूर करने, किसानों को प्रशिक्षण देने एवं दुग्ध उत्पादन में नई तकनीक व नई जानकारी देने का कार्य किया जा रहा है, जिससे प्रति पशु दुग्ध उत्पादकता में वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दुग्ध सहकारिता के माध्यम से पशुपालन एवं दुग्ध व्यवसाय को कृषि के सहयोगी व्यवसाय के रुप में अपनाया जा रहा है। वर्तमान में दुग्ध व्यवसाय शहरी एवं ग्रामीण स्तर पर स्वरोजगार का सशक्त माध्यम बन चुका है। यह किसानों और पशुपालकों की आय दोगुना करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में अपनी बड़ी भूमिका का निर्वहन कर रहा है।
मंत्री धर्मपाल सिंह ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर है। दुग्ध उत्पादकों के हित में प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं, जिसमें कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम का लाभ तथा तकनीकी निवेश की सुविधा दुग्ध उत्पादकों को उनके द्वार पर ही उपलब्ध करायी जा रही है और पशु प्रजनन, पोषण एवं प्रबन्धन का प्रशिक्षण भी मिल रहा है। मोबाइल वेटनरी यूनिट द्वारा पशुओं की त्वरित चिकित्सा की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
इस अवसर पर पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के प्रमुख सचिव के. रविन्द्र नायक ने कहा कि दुग्ध समितियों के भुगतान को प्राथमिकता दी जाएगी और निष्क्रिय समितियों को पुनर्जीवित किए जाने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रमुख सचिव ने बताया कि गोकुल पुरस्कार के तहत दुग्ध विकस के अन्तर्गत दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करने हेतु कृषकों को प्रोत्साहन देने के लिए गोकुल पुरस्कार का वितरण प्रत्येक वित्तीय वर्ष में किया जाता है। गोकुल पुरस्कार के चयन के लिए वे ही दुग्ध उत्पादन पात्र होते है, जिनके द्वारा वित्तीय वर्ष 5000 ली0 या इससे अधिक दूध दुग्ध समिति में आपूर्ति किया गया हो। प्रदेश की दुग्ध समिति में सर्वाधिक दुग्ध आपूर्तिकर्ता दुग्ध उत्पादक को प्रथम एवं द्वितीय लाभार्थी को राज्य स्तरीय पुरस्कार तथा शेष को जनपद स्तरीय पुरस्कार वितरित किया जाता है। इस अवसर पर दुग्ध आयुक्त राकेश कुमार मिश्र, पीसीडीएफ के प्रबन्ध निदेशक आनंद कुमार, विशेष सचिव दुग्ध विकास विभाग राम सहाय यादव, दुग्ध संघों के निर्वाचित अध्यक्ष एवं दुग्ध संघो के अधिकारी व कर्मचारी भी उपस्थित थे।